Saturday, June 14, 2014
Tuesday, June 3, 2014
पथरी....
पथरी.....
मित्रो जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं )
क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|
क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|
आयुर्वेदिक इलाज !
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पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके पत्तों को पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!!
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पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके पत्तों को पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!!
होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे|
वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये|
वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये|
(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )
अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |
इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|
99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महिने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह गया है | अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है |
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ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???
ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???
इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000|
प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|
प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|
मोटापा [Obesity]
मोटापा एक बीमारी है जो अनेक कारणों से होती है यथा व्यायाम न करना , हर समय आराम करना , अधिक मात्रा में चिकने व मीठे पदार्थों का सेवन आदि | कुछ लोगों में मोटापा वंशानुगत भी होता है | मोटापे के कारण रक्तचाप बढ़ जाता है और वायु संचरण में रुकावट महसूस होती है| मोटापे के कारण त्वचा फूल जाती है जिससे शरीर पूर्ण रूप से वायु ग्रहण नहीं कर पाता | अधिक चर्बी के कारण हृदय पर भी प्रभाव पढता है जिससे हृदय की गति धीमी हो जाती है|
मोटापे से छुटकारा पाने के लिये जीवनशैली में परिवर्तन की आवश्यकता होती है | आईये जानते हैं इससे छुटकारा पाने के कुछ सरल उपाय -
मोटापा एक बीमारी है जो अनेक कारणों से होती है यथा व्यायाम न करना , हर समय आराम करना , अधिक मात्रा में चिकने व मीठे पदार्थों का सेवन आदि | कुछ लोगों में मोटापा वंशानुगत भी होता है | मोटापे के कारण रक्तचाप बढ़ जाता है और वायु संचरण में रुकावट महसूस होती है| मोटापे के कारण त्वचा फूल जाती है जिससे शरीर पूर्ण रूप से वायु ग्रहण नहीं कर पाता | अधिक चर्बी के कारण हृदय पर भी प्रभाव पढता है जिससे हृदय की गति धीमी हो जाती है|
मोटापे से छुटकारा पाने के लिये जीवनशैली में परिवर्तन की आवश्यकता होती है | आईये जानते हैं इससे छुटकारा पाने के कुछ सरल उपाय -
१- मोटापे से पीड़ित व्यक्ति को प्रातःकाल उठकर टहलना चाहिए तथा आसान व प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करना चाहये | ऐसा करने से वजन बहुत तेज़ी से घटता है |
२- २५ मिलीलीटर में नींबू के रस में २५ ग्राम शहद मिलाकर १०० मिलीलीटर गुनगुने पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से मोटापा दूर होता है |
३- सूखा धनिया,मिश्री और मोटी सौंफ को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच सुबह पानी के साथ लेने से अधिक चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है | मधुमेह के रोगी यह प्रयोग न करें |
४- तुलसी के पत्तों का रस १० बूँद और शहद २ चम्मच को एक गिलास पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से मोटापा कम होता है |
५- टमाटर और प्याज में थोड़ा सा सेंधा नमक और थोड़ी सी पीसी हुई काली मिर्च डालकर भोजन से पहले सलाद के रूप में खाने से भूख कम लगती है और मोटापा कम होता है |
६- रात को सोने से पहले १५ ग्राम त्रिफला चूर्ण को हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इस पानी को छानकर एक चम्मच शहद मिलकर पी लें | इससे मोटापा जल्दी दूर होता है |
बनाये सत्तू का नमकीन शर्बत।
सत्तू का शर्बत (Sattu Drink) बिहार क्षेत्र की एक बहुत ही पॉपुलर और पारम्पारिक डिश है जिसे मीठा और नमकीन दो अलग अलग तरीकों से बनाया जाता है, सत्तू हमारे स्वास्थ के लिये काफी लाभदायक होता है क्योंकि इसमें अधिक मात्रा मे पौषक तत्व जैसे – फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स और भी अन्य तत्व आदि पाये जाते है। सत्तू को बनाने लिये चना और गेंहू को भुनवाकर पीसकर बनाया जाता है और इसके प्रयोग से बहुत सी डिशेस भी तैयार की जाती है, गर्मियों के दिनों में सत्तू क प्रयोग करना खासतौर पर बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि इससे हमारे शरीर को ठंडक मिलती है। आज हम आपसे सत्तू का नमकीन शर्बत बनाने की विधि शेयर करेंगें जिससे आप भी इसे आसानी से बना सकें तो आईये आज हम सत्तू का नमकीन शर्बत (Salty Sattu Drink) बनायेंगें।
आवश्यक सामग्री (Ingredients For Salty Sattu Drink Recipe )-
सत्तू (Sattu)- आधा कप
ठंडा पानी (Chilled Water)- डेढ़ गिलास
नींबू का रस (Lemon Juice)- 2 चम्मच
भुना जीरा पाउडर (Roasted Cumin Powder)- आधा चम्मच
काला नमक (Black Salt)- आधा चम्मच
पुदीना के पत्ते (Mint Leaves)- 10-12
हरी मिर्च (Green Chilly)- 1/2-1 (Optional) (बिल्कुल बारीक काट लें)
प्याज (Onion)- 1/2 (बिल्कुल बारीक काट लें) (Optional)
सादा नमक (Salt)- स्वादानुसार
आइस क्यूब (Ice Cubes)- 2-३
सत्तू (Sattu)- आधा कप
ठंडा पानी (Chilled Water)- डेढ़ गिलास
नींबू का रस (Lemon Juice)- 2 चम्मच
भुना जीरा पाउडर (Roasted Cumin Powder)- आधा चम्मच
काला नमक (Black Salt)- आधा चम्मच
पुदीना के पत्ते (Mint Leaves)- 10-12
हरी मिर्च (Green Chilly)- 1/2-1 (Optional) (बिल्कुल बारीक काट लें)
प्याज (Onion)- 1/2 (बिल्कुल बारीक काट लें) (Optional)
सादा नमक (Salt)- स्वादानुसार
आइस क्यूब (Ice Cubes)- 2-३
विधि (How To Make Salty Sattu Drink)-
सत्तू का नमकीन शर्बत बनाने के लिये सबसे पहले एक बड़े बर्तन मे सत्तू को छानकर निकाल लें और छने हुये सत्तू को थोड़ा थोड़ा करीब आधा कप ठंडा पानी मिलाकर घोल बना लें और इस बात क़ा खास ध्यान रखें कि सत्तू के घोल मे गुठलियाँ नहीं पड़नी चहिये। अब पुदीना के पत्तों को पानी से अच्छी तरह से धोकर बारीक काट लें, इसके बाद जो हमने सत्तू घोल बनाया था उसमें सभी कटी हुई सामग्रियों जैसे- कटी हुई पुदीना की पत्तियाँ, कटी हुई हरी मिर्च, कटी हुई प्याज, क़ाला नमक, सादा नमक, नींबू का रस, भुना जीरा पाउडर और ठंडे पानी (आप अपने अनुसार शर्बत को जितना पतला रखना चाहते हो उसी मे अनुसार पानी मिला लें) को डालकर एक चम्मच की सहायता से अच्छी तरह से मिक्स कर लें जिससे सभी मसाले आपस मे अच्छी तरह से मिल जाये। स्वादिष्ट और पौष्टिक सत्तू का नमकीन शर्बत (Salty Sattu Drink) बनकर तैयार हो गया है, ठंडे ठंडे सत्तू के नमकीन शर्बत को सर्विंग गिलास मे निकालकर ऊपर से आइस क्यूब और पुदीना के पत्तों से गार्निश करके तुरंत ही सर्व करें, यह शर्बत खासतौर पर गर्मी के दिनों के लिये वास्तव में एक बहुत ही रिफ्रेशिंग और फ़ायदेमंद ड्रिंक है।
सत्तू का नमकीन शर्बत बनाने के लिये सबसे पहले एक बड़े बर्तन मे सत्तू को छानकर निकाल लें और छने हुये सत्तू को थोड़ा थोड़ा करीब आधा कप ठंडा पानी मिलाकर घोल बना लें और इस बात क़ा खास ध्यान रखें कि सत्तू के घोल मे गुठलियाँ नहीं पड़नी चहिये। अब पुदीना के पत्तों को पानी से अच्छी तरह से धोकर बारीक काट लें, इसके बाद जो हमने सत्तू घोल बनाया था उसमें सभी कटी हुई सामग्रियों जैसे- कटी हुई पुदीना की पत्तियाँ, कटी हुई हरी मिर्च, कटी हुई प्याज, क़ाला नमक, सादा नमक, नींबू का रस, भुना जीरा पाउडर और ठंडे पानी (आप अपने अनुसार शर्बत को जितना पतला रखना चाहते हो उसी मे अनुसार पानी मिला लें) को डालकर एक चम्मच की सहायता से अच्छी तरह से मिक्स कर लें जिससे सभी मसाले आपस मे अच्छी तरह से मिल जाये। स्वादिष्ट और पौष्टिक सत्तू का नमकीन शर्बत (Salty Sattu Drink) बनकर तैयार हो गया है, ठंडे ठंडे सत्तू के नमकीन शर्बत को सर्विंग गिलास मे निकालकर ऊपर से आइस क्यूब और पुदीना के पत्तों से गार्निश करके तुरंत ही सर्व करें, यह शर्बत खासतौर पर गर्मी के दिनों के लिये वास्तव में एक बहुत ही रिफ्रेशिंग और फ़ायदेमंद ड्रिंक है।
Thursday, May 29, 2014
इमली-
इमली से हम सब परिचित हैं | इमली के वृक्ष काफी ऊँचे होते हैं तथा सघन छायादार होने के कारण सडकों के किनारे भी इसके वृक्ष लगाए जाते हैं | इमली का वृक्ष उष्णकटिबंधीय अफ्रीका तथा मेडागास्कर का मूल निवासी है | वहां से यह भारत में आया और अब पूरे भारतवर्ष में प्राप्त होता है | यहाँ से ईरान तथा सऊदी अरब में पहुंचा जहाँ इसे तमार-ए-हिन्द (भारत का खजूर ) कहते हैं |इसका पुष्पकाल फ़रवरी से अप्रैल तथा फलकाल नवंबर से जनवरी तक होता है | इसके फल में शर्करा,टार्टरिक अम्ल,पेक्टिन,ऑक्जेलिक अम्ल तथा मौलिक अम्ल आदि तथा बीज में प्रोटीन,वसा,कार्बोहायड्रेट तथआ खनिज लवण प्राप्त होते हैं | यह कैल्शियम,लौह तत्व,विटामिन B ,C तथा फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है |आज हम आपको इमली के औषधीय गुणों से अवगत करा रहे हैं -
इमली से हम सब परिचित हैं | इमली के वृक्ष काफी ऊँचे होते हैं तथा सघन छायादार होने के कारण सडकों के किनारे भी इसके वृक्ष लगाए जाते हैं | इमली का वृक्ष उष्णकटिबंधीय अफ्रीका तथा मेडागास्कर का मूल निवासी है | वहां से यह भारत में आया और अब पूरे भारतवर्ष में प्राप्त होता है | यहाँ से ईरान तथा सऊदी अरब में पहुंचा जहाँ इसे तमार-ए-हिन्द (भारत का खजूर ) कहते हैं |इसका पुष्पकाल फ़रवरी से अप्रैल तथा फलकाल नवंबर से जनवरी तक होता है | इसके फल में शर्करा,टार्टरिक अम्ल,पेक्टिन,ऑक्जेलिक अम्ल तथा मौलिक अम्ल आदि तथा बीज में प्रोटीन,वसा,कार्बोहायड्रेट तथआ खनिज लवण प्राप्त होते हैं | यह कैल्शियम,लौह तत्व,विटामिन B ,C तथा फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है |आज हम आपको इमली के औषधीय गुणों से अवगत करा रहे हैं -
१- १० ग्राम इमली को एक गिलास पानी में भिगोकर,मसल-छानकर ,शक्कर मिलाकर पीने से सिर दर्द में लाभ होता है |
२- इमली को पानी में डालकर ,अच्छी तरह मसल- छानकर कुल्ला करने से मुँह के छालों में लाभ होता है|
३- १० ग्राम इमली को १ लीटर पानी में उबाल लें जब आधा रह जाए तो उसमे १० मिलीलीटर गुलाबजल मिलाकर,छानकर, कुल्ला करने से गले की सूजन ठीक होती है |
४-इमली के दस से पंद्रह ग्राम पत्तों को ४०० मिलीलीटर पानी में पकाकर ,एक चौथाई भाग शेष रहने पर छानकर पीने से आंवयुक्त दस्त में लाभ होता है |
५- इमली की पत्तियों को पीसकर गुनगुना कर लेप लगाने से मोच में लाभ होता है |
६-इमली के बीज को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद में लाभ होता है |
७- गर्मियों में ताजगी दायक पेय बनाने के लिए इमली को पानी में कुछ देर के लिए भिगोएँ व मसलकर इसका पानी छान लें। अब उसमें स्वादानुसार गुड़ या शक़्कर , नमक व भुना जीरा डाल लें। इसमें ताजे पुदीने की पत्तियाँ स्फूर्ति की अनुभूति बढ़ाती हैं ,अतः ताजे पुदीने की पत्तियाँ भी इस पेय में डाली जा सकती हैं |
नोट -- चूँकि इमली खट्टी होती है अतः इसे भिगोने के लिए कांच या मिट्टी के बर्तन का उपयोग किया जाना चाहिए |
नाव की जंजीर जैसे तट से बंधी रह गयी थी, ऐसे ही इस स्थिति में वह भी कहीं बंधा रह जाता है। इस बंधन को धर्म ने वासना कहा है।
वासना से बंधा मनुष्य, आनंद के निकट पहुंचने के भ्रम में बना रहता है। पर उसकी दौड़ एक दिन मृग-मरीचिका सिद्ध होती है। वह कितनी ही पतवार चलाये, उसकी नाव अतृप्ति के तट को छोड़ती ही नहीं है। वह रिक्त और अपूर्ण ही जीवन को खो देता है। वासना स्वरूपत: दुष्पूर है। जीवन चूक जाता है- वह जीवन जिसमें दूसरा किनारा पाया जा सकता था, वह जीवन जिसमें यात्रा पूरी हो सकती थी, व्यर्थ हो जाता है और पाया जाता है कि नाव वहीं की वहीं खड़ी है।
प्रत्येक नाविक जानता है कि नाव को सागर में छोड़ने के पहले तट से खोलना पड़ता है। प्रत्येक मनुष्य को भी जानना चाहिए कि आनंद के, पूर्णता के, प्रकाश के सागर में नाव छोड़ने के पूर्व तट वासना की जंजीरें अलग कर लेनी होती हैं।
इसके बाद तो फिर शायद पतवार भी नहीं चलानी पड़ती है! रामकृष्ण ने कहा है, 'तू नाव तो छोड़, पाल तो खोल, प्रभु की हवाएं प्रतिक्षण तुझे ले जाने को उतसुक है !!
वासना से बंधा मनुष्य, आनंद के निकट पहुंचने के भ्रम में बना रहता है। पर उसकी दौड़ एक दिन मृग-मरीचिका सिद्ध होती है। वह कितनी ही पतवार चलाये, उसकी नाव अतृप्ति के तट को छोड़ती ही नहीं है। वह रिक्त और अपूर्ण ही जीवन को खो देता है। वासना स्वरूपत: दुष्पूर है। जीवन चूक जाता है- वह जीवन जिसमें दूसरा किनारा पाया जा सकता था, वह जीवन जिसमें यात्रा पूरी हो सकती थी, व्यर्थ हो जाता है और पाया जाता है कि नाव वहीं की वहीं खड़ी है।
प्रत्येक नाविक जानता है कि नाव को सागर में छोड़ने के पहले तट से खोलना पड़ता है। प्रत्येक मनुष्य को भी जानना चाहिए कि आनंद के, पूर्णता के, प्रकाश के सागर में नाव छोड़ने के पूर्व तट वासना की जंजीरें अलग कर लेनी होती हैं।
इसके बाद तो फिर शायद पतवार भी नहीं चलानी पड़ती है! रामकृष्ण ने कहा है, 'तू नाव तो छोड़, पाल तो खोल, प्रभु की हवाएं प्रतिक्षण तुझे ले जाने को उतसुक है !!
असली शहद जांचने का तरीका
१. रुई की बत्ती बनाकर उसको शहद में डुबो कर आग पर जलाये. अगर जलने पर तड-तड आवाज आती है तो समझिये शहद में मिलावट है. शुद्ध शहद होने पर कोई आवाज नहीं आती है.
२. एक कांच के गिलास में पानी ले और शहद डाले. अगर शहद बिना घुले नीचे तक पहुच जाता है तो शहद शुद्ध है. अशुद्ध शहद नीचे पहुँचने से पहले ही घुलने लगेगा.
Monday, May 26, 2014
एसिडिटी
के घरेलू उपचार:
1-विटामिन बी और ई युक्त सब्जियों का अधिक सेवन करें।
2-व्यायाम और शारीरिक गतिविधियाँ करते रहें।
3-खाना खाने के बाद किसी भी तरह के पेय का सेवन ना करें।
4-बादाम का सेवन आपके सीने की जलन कम करने में मदद करता है।
5-खीरा, ककड़ी और तरबूज का अधिक सेवन करें।
6-पानी में नींबू मिलाकर पियें, इससे भी सीने की जलन कम होती है।
7-नियमित रूप से पुदीने के रस का सेवन करें ।
8-तुलसी के पत्ते एसिडिटी और मतली से काफी हद तक राहत दिलाते हैं।
9-नारियल पानी का सेवन अधिक करें।
1-विटामिन बी और ई युक्त सब्जियों का अधिक सेवन करें।
2-व्यायाम और शारीरिक गतिविधियाँ करते रहें।
3-खाना खाने के बाद किसी भी तरह के पेय का सेवन ना करें।
4-बादाम का सेवन आपके सीने की जलन कम करने में मदद करता है।
5-खीरा, ककड़ी और तरबूज का अधिक सेवन करें।
6-पानी में नींबू मिलाकर पियें, इससे भी सीने की जलन कम होती है।
7-नियमित रूप से पुदीने के रस का सेवन करें ।
8-तुलसी के पत्ते एसिडिटी और मतली से काफी हद तक राहत दिलाते हैं।
9-नारियल पानी का सेवन अधिक करें।
पित्त वृद्धि [acid ]
पित्त वृद्धि
आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मानव शरीर , प्रकृति में व्याप्त पांच तत्वों से मिलकर बना है ये तत्व हैं -वायु,जल,अग्नि,आकाश और पृथ्वी |
आयुर्वेद ने इन पांच तत्वों को मूल तत्व समझते हुए इनकी उपस्थिति को वात ,पित्त और कफ के नाम से संज्ञान में लिया है | दिन के मध्य प्रहर और रात्री के मध्य प्रहर में पित्त बढ़ता है।
पित्त की वृद्धि से कब्ज़ ,सिरदर्द ,भूख न लगना ,सुस्ती आदि के लक्षण होते हैं | पित्त की वृद्धि का उपचार विभिन्न औषधियों द्वारा किया जा सकता है :--
१-हरीतकी का चूर्ण सुबह -शाम मिश्री के साथ खाने से पित्त की वृद्धि ठीक होती है और जलन भी शांत होती है |
आयुर्वेद ने इन पांच तत्वों को मूल तत्व समझते हुए इनकी उपस्थिति को वात ,पित्त और कफ के नाम से संज्ञान में लिया है | दिन के मध्य प्रहर और रात्री के मध्य प्रहर में पित्त बढ़ता है।
पित्त की वृद्धि से कब्ज़ ,सिरदर्द ,भूख न लगना ,सुस्ती आदि के लक्षण होते हैं | पित्त की वृद्धि का उपचार विभिन्न औषधियों द्वारा किया जा सकता है :--
१-हरीतकी का चूर्ण सुबह -शाम मिश्री के साथ खाने से पित्त की वृद्धि ठीक होती है और जलन भी शांत होती है |
२-पित्त बढ़ने पर मुनक्के का सेवन भी अति लाभकारी है | इससे भी पित्त की जलन दूर होती है |
३- कागज़ी नींबू का शरबत सुबह -शाम पीने से पित्त की वृद्धि बंद हो जाती है |
४-गिलोय का रस 10 ml रोज़ तीन बार शहद में मिलाकर लेने से लाभ होता है |
५-छोटी इलायची सुबह -शाम खाने से पित्त में लाभ होता है |
- सौंफ , धनिया ( सुखा या हरा ) , हिंग , अजवाइन , आंवला आदि पित्त को नियंत्रित करते है।
- सुबह सुबह छाछ , निम्बू पानी , नारियल पानी , मूली , फलों के रस आदि के सेवन से पित्त नहीं बढ़ता।
- सौंफ , धनिया ( सुखा या हरा ) , हिंग , अजवाइन , आंवला आदि पित्त को नियंत्रित करते है।
- सुबह सुबह छाछ , निम्बू पानी , नारियल पानी , मूली , फलों के रस आदि के सेवन से पित्त नहीं बढ़ता।
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