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Friday, September 18, 2020

स्वयं की ऊर्जावान रखें

स्वयम को सदा ऊर्जावान व् सकारात्मक रखें ।

theory of frequency ...!

👤  **अक्सर जब आपके साथ कोई घटना होती है तो हमें यही कहा जाता है कि तुम्हारे कर्म ही ऐसे है या फिर , तुम्हारे ग्रह अभी ऐसे थे जिसके कारण यह सब घटित हुआ ....! बात सही भी है व्यक्ति हमेशा अपने ग्रहों से प्रेरित रहता है , चाहे ज्ञानी या अज्ञानी , हर व्यक्ति अपने ग्रहों से हर जगह प्रभावित रहता है लेकिन ग्रह और व्यक्ति के बीच में एक ऐसी चीज़ है जिसे बदला जाए तो घटनायें बदली जा सकती है .....! इसे आप ऐसे समझें ... आपकी आँखों  👀की रोशनी कमज़ोर हो गयी है , अब आपको सबकुछ साफ़ नहीं दिखता लेकिन अगर आप नम्बर का चश्मा 🤓use करना शुरू करे तो आप वापस चीज़ों को साफ़ देख सकेंगे , .... सही कहे तो frequency इस चश्मे की तरह ही काम करके चीज़ों को बदल देती है ....! 

📃 **फ़्रीक्वन्सी को समझने के लिए हमें meta physics के सूत्रों को जानना पड़ता है लेकिन विनय विराट ••• theory of success में इसे हम बड़ी आसानी से समझने की कोशिश कर रहे है कि इस सूत्र का लाभ हर किसी को मिल सके ...! Frequency दो तरह की होती है एक higher और एक lower .., जब आप ख़ुद को अभाव में महसूस करते है , आपको दूसरे ग़लत लगते है , आपको उनसे शिकायत है कि वो ग़लत कर रहे है , आपका मन बिलकुल नहीं लग रहा , आप उदास है , आपको अपने जीवन के प्रति कोई उत्साह नहीं है , आपको लगता है कि लोग बहुत स्वार्थी हैं तो ये सब फ़ीलिंग यह शो करती है कि आप low frequency पर है , अब चाहे आपके ग्रह अच्छे भी हो लेकिन वो सुप्त हो जाएँगे और जो नेगेटिव ग्रह है वो active होकर आपको बुरी घटनायें देंगे .....!! 

😇 **दूसरी तरफ़ जब आपको जीवन के प्रति बहुत ज़्यादा उत्साह है , आपको लगता है कि आपके परिवार वाले , आपके मित्र , आपके आस पास सब लोग बहुत प्यारे और सहयोगी हैं , आप हमेशा ख़ुद को लकी फ़ील करते है , आपके अंदर हर व्यक्ति के लिए प्रशंसा की भावना है , आपको लगता है कि भगवान ने आपको कितना ज़्यादा दिया है , आपको हर तरफ़ समृद्धि की फ़ीलिंग ही नज़र आती है ..., तो यह फ़्रीक्वन्सी higher फ़्रीक्वन्सी है ....! जब आप हाइअर फ़्रीक्वन्सी पर होते हो तो आपके सारे शुभ ग्रह active होकर आपको अच्छी घटनायेंदेते है इसलिए जो व्यक्ति फ़्रीक्वन्सी को higher  रखना सीख जाए उस व्यक्ति का जीवन सुखी और मस्ती से भरा रहता है .......!! 

👉🏻 **traditional प्रवचन में जब आप सुनते हो कि कोई तुम्हारे साथ नहीं चलेगा , मृत्यु के समय तुम्हें अकेले ही  जाना पड़ेगा , दुनिया अपने स्वार्थ से भरी पड़ी है , यहाँ कोई किसी का नहीं है सब काम के रिश्ते रखते हैं आदि .... तो यक़ीन कीजिए ऐसी बातें आपको low फ़्रीक्वन्सी पर लेकर चली जाती है जहाँ आपके साथ नेगेटिव घटनायें होगी , अगर आप देखे कि कोई सन्यासी जो संसार को आसार मानता है और अपने प्रवचन में बार बार नेगेटिव चीज़ कहता है तो उसे या तो acidity या अनिद्रा की समस्या शुरू होगी , इसका कारण है कि जब आप बार बार इस संसार को नेगेटिव कहते है तो आपका शनि ग्रह active हो जाता है और वही इस समस्या का कारक ग्रह है ......! 

👉🏻🌍 *ये दुनिया वाक़ई बहुत प्यारी है , अक्सर लोग सोचते है कि मोक्ष के बाद आनंद है और मोक्ष तभी होगा जब आपको अपनी वर्तमान लाइफ़ waste लगेगी पर वैसा नहीं है , जब आपको इसी पल अपना जीवन बहुत amazing लगे यक़ीन कीजिए तभी आपकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई है ...! वास्तव में जो व्यक्ति हमेशा higher फ़्रीक्वन्सी पर रहता है वो पुण्य का बंध ही करता है , उसकी लेश्या मात्र से लोगों के दुःख दूर हो जाते हैं , उसके एक भाव से किसी के जीवन में आ रही मुश्किलें दूर हो जाती है ,..... मित्रों इसलिए फ़्रीक्वन्सी के इस नियम को जाने और ख़ुद को हमेशा एक higher frequency पर रखे जहाँ आपको अपना जीवन बहुत ही superb लगे और आप हर पल को enjoy करे .....!!

धन्यवाद 🙏🏻

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