Google+

Monday, September 28, 2020

भगत (भक्त )

(((((((((( पुरूषार्थ करो ))))))))))
.
एक भगतड़ा था सब देवी देवताओं को मानता था और आशा करता था...
.
मुझे कोई मुसीबत पड़ेगी तब देवी देवता मेरी सहायता करेंगे।
.
शरीर से हट्टाकट्टा, मजबूत था।
.
बैलगाड़ी चलाने का धन्धा करता था।
.
एक दिन उसकी बैलगाड़ी कीचड़ में फँस गई।
.
वह भगतड़ा बैलगाड़ी पर बैठा-बैठा एक-एक देव को पुकारता है कि-
.
हे देव ! मुझे मदद करो। मेरी नैया पार करो। मैं दीन हीन हूँ। मैं निर्बल हूँ।
.
मेरा जगत में कोई नहीं। मैं इतने वर्षों
में तुम्हारी सेवा करता हूँ...
.
फूल चढ़ाता हूँ... स्तुति भजन गाता हूँ।
.
इसलिए गाता था कि ऐसे मौके पर तुम मेरी सहायता करो।
.
इस प्रकार भगतड़ा एक-एक देव को गिड़गिड़ाता रहा।
.
अन्धेरा उतर रहा था। निर्जन और सन्नाटे के स्थान में कोई चारा न देखकर आखिर उसने हनुमान जी को बुलाया।
.
बुलाता रहा.... बुलाता रहा....। बुलाते-बुलाते अनजाने में चित्त शान्त हुआ।
.
संकल्प सिद्ध हुआ। हनुमान जी प्रकट हुए।
.
हनुमान जी को देखकर बड़ा खुश हुआ।
.
और सब देवों को बुलाया लेकिन किसी ने सहायता नहीं की।
.
आप ही मेरे इष्टदेव हैं। अब मैं आपकी ही पूजा करूँगा।
.
हनुमान जी ने पूछाः क्यों बुलाया है ?
.
भगतड़े ने कहाः हे प्रभु ! मेरी बैलगाड़ी कीचड़ में फँसी है। आप निकलवा दो।
.
पुरुषार्थमूर्ति हनुमान जी ने कहाः हे दुर्बुद्धि !
.
तेरे अन्दर अथाह सामर्थ्य है, अथाह बल है। नीचे उतर। जरा पुरुषार्थ कर।
.
दुर्बल विचारों से अपनी शक्तियों का नाश करने वाले दुर्बुद्धि !
.
हिम्मत कर नहीं तो फिर गदा मारूँगा।
.
निदान, वह हट्टाकट्टा तो था ही। लगाया जोर पहिए को।
.
गाड़ी कीचड़ से निकालकर बाहर कर दी।
.
हनुमान जी ने कहाः यह बैलगाड़ी तो क्या, तू पुरुषार्थ करे तो....
.
जन्मों-जन्मों से फँसी हुई तेरी बुद्धिरूपी बैलगाड़ी संसार के कीचड़ से निकाल कर परम तत्त्व का साक्षात्कार भी कर सकता है,
.
परम तत्त्व में स्थिर भी हो सकता है।

No comments:

Post a Comment