💥 *धन और धर्म में कौन महान!*
*इसका जवाब बहुत सुंदर कविता के रूप में है, "धन की रक्षा करनी पड़ती है" धर्म हमारी रक्षा करता है।*
*धन के लिए पाप करना पड़ता है,*
*धर्म से पाप का त्याग होता है।*
*धन मित्रों को भी दुश्मन बना देता है,*
*धर्म दुश्मनों को भी मित्र बना देता है।*
*धन रहते हुए भी व्यक्ति दुःखी है,*
*धर्म से व्यक्ति दुःख में भी सुखी है।*
*धन इच्छा को बढ़ाता है,*
*धर्म इच्छाओं को घटाता है।*
*धन में लाभ हानि चलती रहती है,*
*धर्म में फायदा ही फायदा है।*
*धन चार गति में भटकाता है,*
*धर्म चार गतियों से पार कराता है।*
*धन से रोग बढ़ता है,*
*धर्म से जीवन स्वस्थ बनता है।*
*धन अशाश्वत है,*
*धर्म शाश्वत है।*
*धन का साथ इसी भव तक है,*
*धर्म परभव में भी साथ रहता है।*
*जो सच्चे मन से अपनाता है धर्म,*
*उसके निरंतर कटते रहते है कर्म'* *इसलिए सच्चे धर्म को गहराई से समझना चाहिए। संसार मे हर कार्य हम सोच समझकर करते है, बस धर्म ही एक ऐसी वस्तु है जो हम बिना सोचे समझे सिर्फ करते है। धर्म तो समझकर जीवन मे उतारने की, जीने - मरने की कला है, जो हमें अनंत भव भ्रमण के चक्कर से बचाता है। अंधश्रद्धा से नहीं, कुल परम्परा से नहीं, किसी भी आग्रहों के बिना, सच्चे धर्म को समझकर मुक्ति की ओर बढ़े व अपने मनुष्य भव को सफल बनाये। 💎 जय प्रभु !!*🙏
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