नजरिया अपना अपना
दो बहुत ही वृद्ध सज्जन एक बगीचे में बैठे गप्पे लगा रहे थे.
एक ने कहा -- मुझे पूरे शरीर में परेशानी है. सभी हिस्से जवाब दे रहे हैं और शरीर मेंबहुत दर्द रहता है. तुम कैसा अनुभव करते हो?
दूसरे ने बिना दांत के मुस्कुरा कर कहा -- मैं तो नवजात बच्चे की भांति महसूस करता हूँ.
पहले वाले ने आश्चर्य के साथ कहा-- वास्तव में! एक नवजात बच्चे की तरह?
दूसरे ने फिर हंसते हुए कहा -- बाल नहीं, दांत नहीं, शरीर पर अपना नियंत्रण नहीं और हाँ मैंने अपनी पैंट गीली कर ली है.
अज्ञात
दो बहुत ही वृद्ध सज्जन एक बगीचे में बैठे गप्पे लगा रहे थे.
एक ने कहा -- मुझे पूरे शरीर में परेशानी है. सभी हिस्से जवाब दे रहे हैं और शरीर मेंबहुत दर्द रहता है. तुम कैसा अनुभव करते हो?
दूसरे ने बिना दांत के मुस्कुरा कर कहा -- मैं तो नवजात बच्चे की भांति महसूस करता हूँ.
पहले वाले ने आश्चर्य के साथ कहा-- वास्तव में! एक नवजात बच्चे की तरह?
दूसरे ने फिर हंसते हुए कहा -- बाल नहीं, दांत नहीं, शरीर पर अपना नियंत्रण नहीं और हाँ मैंने अपनी पैंट गीली कर ली है.
अज्ञात
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