संत शिरोमणी कबीरजी ने मनुष्य की कथनी और करनी के विषय में कहा हैं कि व्यक्ति के मुँह से जैसी बात निकले, उसी पर यदि आचरण किया जाय और वैसी ही चाल चली जाय, तो पारब्रह्म परमेश्वर तो अपने पास ही खड़ा है, वह उसे उसी क्षण निहाल कर देगा। मतलब यह कि मनुष्य की कथनी और करनी में अंतर नही होना चाहिए !!!
No comments:
Post a Comment