संत शिरोमणी कबीरजी कहते हैं कि अरे भाई, यह माया मोह तुम्हारे गले में बाहें डालकर भी सौ सौ बार बुलाये, तो भी इससे मिलना जुलना अच्छा नहीं । एक बार इसके जाल में फंसने पर बच पाना मुश्किल है. क्योकि जब यह नारद सरीखे मुनिवरों को भी समूचा ही निगल गई, तब इसका विश्वास क्या ?
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